काया कपड़े विहीन नंगे होते हैं ।
झगड़ा कारण रहीत दंगे होते हैं।।
जिनके हो सोच विचार ओछे दैत्यों सा
ऐसे इंसा ही तो लफंगे होते हैं ।।
झगड़ा कारण रहीत दंगे होते हैं।।
जिनके हो सोच विचार ओछे दैत्यों सा
ऐसे इंसा ही तो लफंगे होते हैं ।।
मुखड़ा करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम म...
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