भोले बाबा शंभु हर, हर-हर शंकर ओम ।
बोल बम्ब की नाद से, गूंज रहा है व्योम ।।
गूंज रहा है व्योम, बम्ब भोले का नारा ।
बोल बम्ब जयकार, लगे भक्तों को प्यारा ।।
कांवर लेकर कांध, राह पर भगतन बोले ।
करें कामना पूर्ण, शंभु शिव बाबा भोले ।।
Ramesh Kumar Chauhan
विशेषतः शिल्प प्रधन कविताओं का संग्रह है जिसमें काव्य की सभी विधाओं/शिल्पों पर कविता प्राप्त होगीं । विशषेकर छंद के विभिन्न शिल्प यथा दोहा, चौपाई कवित्त, गीतिका हरिगीतिका, सवैया आदि । जपानी विधि की कविता हाइकु, तोका, चोका । उर्दु साहित्य की विधा गजल, मुक्तक आदि की कवितायें इसमें आप पढ़ सकते हैं ।
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