जिसे भाता ना हो, छल कपट देखो जगत में ।
वही धोखा देते, खुद फिर रहे हैं फकत में ।।
कभी तो आयेगा, तल पर परिंदा गगन से ।
उड़े चाहे ऊॅचे, मन भर वही तो मगन से ।।
मुखड़ा (युगल) आज बंधे दो मन एक डोर में सपनों की उजली भोर में तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में आज बंधे दो मन एक डोर में अ...
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