‘नवाकार’

‘नवाकार’ हिन्दी कविताओं का संग्रह है,विशेषतः शिल्प प्रधन कविताओं का संग्रह है जिसमें काव्य की सभी विधाओं/शिल्पों पर कविता प्राप्त होगीं । विशषेकर छंद के विभिन्न शिल्प यथा दोहा, चौपाई कवित्त, गीतिका हरिगीतिका, सवैया आदि । जपानी विधि की कविता हाइकु, तोका, चोका । उर्दु साहित्य की विधा गजल, मुक्तक आदि की कवितायें इसमें आप पढ़ सकते हैं ।

करुणा करो हे खाटू श्याम

मुखड़ा 
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
मैं उथली नदिया, जलाजल गंभीर सागर हो तुम

अंतरा 1
जब-जब राहों में अंधियारा छाया,
जीवन नैय्या जब भंवर में समाया
केवल तन ही नहीं जब मन भी हारा
तब साथ आते हारे का सहारा 
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम

अंतरा 2
ना पुण्य गिना, ना पाप ही तोला,
प्रेम पीर से,  जब अंतस बोला,
शरण आये नर जब कोई ऐसा,
फलित हो कामना मन में हो जैसा
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम

अंतरा 3
मेरे  तन के रोम-रोम पुकारे,
श्याम ही है हमारे सहारे
पार लगाओ अब नैय्या मोरी
तुम्हारी दया है अति पावन भोरी
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम

अंतरा 4 
दास रमेश बस यही कहे,
चरणों में जीवन मेरा रहे,
नहीं दुनिया में कोई मेरे सगे
श्याम बिना सब व्यर्थ ही लगे
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम

करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम
करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम
मैं उथली नदिया, जलाजल गंभीर सागर हो तुम

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