सैनिक की माँ पूछती, कब तक मरे जवान ।
लड़े बिना शहीद हुये, बेटा मेरे प्राण ।।
बेटा मेरे प्राण, दूध मेरा पीया है ।
मरा देश के नाम, देश हित ही जीया है ।।
मुझे नही मंजूर, मृत्यु वीरों का दैनिक ।
बिना लड़े इक युद्ध, मरे ना कोई सैनिक ।।
Ramesh Kumar Chauhan
विशेषतः शिल्प प्रधन कविताओं का संग्रह है जिसमें काव्य की सभी विधाओं/शिल्पों पर कविता प्राप्त होगीं । विशषेकर छंद के विभिन्न शिल्प यथा दोहा, चौपाई कवित्त, गीतिका हरिगीतिका, सवैया आदि । जपानी विधि की कविता हाइकु, तोका, चोका । उर्दु साहित्य की विधा गजल, मुक्तक आदि की कवितायें इसमें आप पढ़ सकते हैं ।
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