शोभन
मौत सदा सच है फिर भी, डरे क्यों मन प्राण ।
जीवन जीने का होता, उसे क्यों अभियान ।।
कर्म सार है जीवन का, बांटे कृष्ण ज्ञान ।
मानवता एक धर्म ही, इसका सार जान ।।
शोभन
मौत सदा सच है फिर भी, डरे क्यों मन प्राण ।
जीवन जीने का होता, उसे क्यों अभियान ।।
कर्म सार है जीवन का, बांटे कृष्ण ज्ञान ।
मानवता एक धर्म ही, इसका सार जान ।।
मुखड़ा करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम म...
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