कठिनाई सर्वत्र है, चलें किसी भी राह ।
बंधन सारे तोड़िये, मन में भरकर चाह ।।
मन में भरकर चाह, बढ़े मंजिल को पाने ।
नहीं कठिन वह लक्ष्य, इसे निश्चित ही जाने ।।
सुनलो कहे रमेश, हौसला है चिकनाई ।
फौलादी संकल्प, तोड़ लेते कठिनाई ।।
मुखड़ा (युगल) आज बंधे दो मन एक डोर में सपनों की उजली भोर में तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में आज बंधे दो मन एक डोर में अ...
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