(111 212 212 11)
विरह पीर से गोपियां व्रज
डगर जोहती श्यामनी तट
नयन ढूंढती श्याम का पथ
अधर श्याम है श्याम है घट
डगर जोहती श्यामनी तट
नयन ढूंढती श्याम का पथ
अधर श्याम है श्याम है घट
-रमेश चौहान
मुखड़ा (युगल) आज बंधे दो मन एक डोर में सपनों की उजली भोर में तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में आज बंधे दो मन एक डोर में अ...
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