रे
इंसा
कट्टर
बनकर
क्यों लगाते हो
घोसलों में आग
जहां तेरा घरौंदा।।
इंसा
कट्टर
बनकर
क्यों लगाते हो
घोसलों में आग
जहां तेरा घरौंदा।।
मुखड़ा करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम म...
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