ये
मन
चंचल
है चाहता
तन छोड़ना
जैसे पत्ते डाल,
छोड़ कर भागता ।
मन
चंचल
है चाहता
तन छोड़ना
जैसे पत्ते डाल,
छोड़ कर भागता ।
मुखड़ा (युगल) आज बंधे दो मन एक डोर में सपनों की उजली भोर में तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में आज बंधे दो मन एक डोर में अ...
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