जो
पत्ते
बिखरे
डाल छोड़े
हवा उड़ाये
बरखा भिगाये
धूल मिट्टी सड़ाये ।।
पत्ते
बिखरे
डाल छोड़े
हवा उड़ाये
बरखा भिगाये
धूल मिट्टी सड़ाये ।।
मुखड़ा (युगल) आज बंधे दो मन एक डोर में सपनों की उजली भोर में तुम हाथ पकड़ कर साथ चलो मैं छाया बन जाऊँ हर मोड़ में आज बंधे दो मन एक डोर में अ...
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