‘नवाकार’

‘नवाकार’ हिन्दी कविताओं का संग्रह है,विशेषतः शिल्प प्रधन कविताओं का संग्रह है जिसमें काव्य की सभी विधाओं/शिल्पों पर कविता प्राप्त होगीं । विशषेकर छंद के विभिन्न शिल्प यथा दोहा, चौपाई कवित्त, गीतिका हरिगीतिका, सवैया आदि । जपानी विधि की कविता हाइकु, तोका, चोका । उर्दु साहित्य की विधा गजल, मुक्तक आदि की कवितायें इसमें आप पढ़ सकते हैं ।

मेरे गांव में

बेजाकब्जा का दौर
बेजाकब्जा का दौर
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
अंतरा 1
घर में था चौरा , अब चौरे में घर 
घर में था चौरा , अब चौरे में घर 
बेजाकब्जा का दौर,
किसी को किसी का कहां डर 
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

अंतरा 2
गलियाँ कभी चौड़ी थी,, अब क्यों सिकुड़ गया
गलियाँ कभी चौड़ी थी,, अब क्यों सिकुड़ गया
बच्चे खेल खेलें कहां अब
गली आँगन उजड़ गया
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

अंतरा 3
खेतों के पास गोचर, गोचर के पास खेत
खेतों के पास गोचर, गोचर के पास खेत
बेजाकब्जा का दौर,
गोचर ही हो गया खेत
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

अंतरा 4
नदिया की पीड़ा अब सुने कौन 
नदिया की पीड़ा अब सुने कौन 
बेजाकब्जा का दौर,
नदियों का कल-कल मौन
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

अंतरा 5
बस्ती में था तालाब , अब तालाब में बस्ती
बस्ती में था तालाब , अब तालाब में बस्ती
बेजाकब्जा का दौर,
खो गई जीवन की मस्ती
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

अंतरा 6
गायों का गौठान, और गोचर की हरियाली 
गायों का गौठान, और गोचर की हरियाली
बेजाकब्जा का दौर,
बचे न कहीं भूमि खाली
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

मुखड़ा (दोहराव)
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को
मेरे गाँव में, देखे कौन गाँव को

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