मैं चाहता हूँ अपने जैसे ही होना
क्यों मढ़ते हो आदर्शो का सोना
अस्तित्व पीतल का भी होता है जग में
क्यों देख कर मुझको आता है रोना
क्यों मढ़ते हो आदर्शो का सोना
अस्तित्व पीतल का भी होता है जग में
क्यों देख कर मुझको आता है रोना
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