तोड़ें उसके दंभ को, दिखा रहा जो चीन ।
चीनी हमें न चाहिये, खा लेंगे नमकीन ।।
राष्ट्र प्रेम के तीर से, करना हमें शिकार ।
बचे नही रिपु एक भी, करना ऐसे वार ।।
- रमेश चौहान
तोड़ें उसके दंभ को, दिखा रहा जो चीन ।
चीनी हमें न चाहिये, खा लेंगे नमकीन ।।
राष्ट्र प्रेम के तीर से, करना हमें शिकार ।
बचे नही रिपु एक भी, करना ऐसे वार ।।
- रमेश चौहान
मुखड़ा करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम म...
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