सोमवार, 12 मार्च 2018

बासी

बासी में है गुण बहुत, मान रहा है शोध ।
खाता था छत्तीसगढ़, था पहले से  बोध ।
था पहले से  बोध, सुबह प्रतिदिन थे खाते ।
खाकर बासी प्याज, काम पर थे सब जाते ।।
चटनी संग "रमेेश",  खाइये छोड़ उदासी ।
भीगा करके भात, बनाया जाता बासी ।

भीगा करके भात को, छोड़ दीजिये रात ।
भीगा चावल रात का, बासी है कहलात ।।
बासी है कहलात, विटामिन जिसमें होता ।
है पौष्टिक आहार, क्षीणता जिससे खोता ।।
खाइये सुबह "रमेश",  पेट अपना तुम भरके ।
इसे बनाओ रात,  भात को भीगा करके ।।

व्यंजन छत्तीसगढ़िया, बोरे बासी खास ।
सुबह-सुबह तो खाइये, जगावे न यह प्यास ।।
जगावे न यह प्यास, पसइया यदि तुम पीते ।
हड्डी बने कठोर, आयु लंबी तुम जीते ।
सुन लो कहे "रमेश", नही यह अभिरंजन ।
बोरे बासी खास, एक है पौष्टिक व्यंजन ।।

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