सोमवार, 3 जुलाई 2017

नेता सोचे बात को

द्वंद पक्ष-विपक्ष करे, हाथ लिये भ्रम जाल ।
फँसे हुये हैं आमजन, चुरा रहे ये माल ।।

सत्य-सत्य होता सदा, नहीं सत्य में भेद ।
राजनीति के द्वंद से, दिखते इसमें छेद ।।

राष्ट्र हमारा एक है, राष्ट्र धर्म भी एक ।
वैचारिक मतभेद से, नेता बने अनेक ।।

लोकतंत्र के ढाल से, करते रहें विरोध ।
राष्ट्रधर्म के राह पर, रचते क्यों अवरोध ।।

सबका परिचय देश से, देश रहे जब एक ।
नेता सोचे बात को, सब जनता है नेक ।।

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