अष्ट दोहे
1
रोटी में होेते नहीं, ढूंढे जो तुम स्वाद ।
होय स्वाद तो भूख में, दिखे नही अपवाद ।।
2
बातें तो हम हैं करें, करें कहां है काम ।
बैठे बैठे चाहते, जग में होवे नाम ।।
3
ज्ञानी हम सब आज है, अज्ञानी ना कोय ।
ज्ञान खजाना हाथ में, फिर भी काहे रोय ।।
4
चिडि़यां बुनती घोसला, तिनका तिनका जोर ।
दुर्बल हो काया भले, मन कोे रखे सजोर ।।
5
चिटी चढ़े दीवार पर, चाहे फिसलन होय ।
गिर गिर सम्हले है जरा, जानेे है हर कोय ।।
6
ढोती चिटियां काष्ठ को, चलती हैं जब संग ।
एक अकेला एक है, चाहे रहे मतंग ।।
7
बुनती हैं मधुमक्खियां, मिलकर छत्ता एक ।
बूंद-बूंद से घट भरा, छलके मधुरस देख ।।
8
जाने तुम हर बात को, पर माने ना एक ।
इंसा हो या दैत्य हो, अपने अंतस देख ।।
रोटी में होेते नहीं, ढूंढे जो तुम स्वाद ।
होय स्वाद तो भूख में, दिखे नही अपवाद ।।
2
बातें तो हम हैं करें, करें कहां है काम ।
बैठे बैठे चाहते, जग में होवे नाम ।।
3
ज्ञानी हम सब आज है, अज्ञानी ना कोय ।
ज्ञान खजाना हाथ में, फिर भी काहे रोय ।।
4
चिडि़यां बुनती घोसला, तिनका तिनका जोर ।
दुर्बल हो काया भले, मन कोे रखे सजोर ।।
5
चिटी चढ़े दीवार पर, चाहे फिसलन होय ।
गिर गिर सम्हले है जरा, जानेे है हर कोय ।।
6
ढोती चिटियां काष्ठ को, चलती हैं जब संग ।
एक अकेला एक है, चाहे रहे मतंग ।।
7
बुनती हैं मधुमक्खियां, मिलकर छत्ता एक ।
बूंद-बूंद से घट भरा, छलके मधुरस देख ।।
8
जाने तुम हर बात को, पर माने ना एक ।
इंसा हो या दैत्य हो, अपने अंतस देख ।।
कुछ दोहे
कल की बातें छोड़ दे, बीत गया सो बीत ।
बीते दिन बहुरे नहीं, यही जगत की रीत ।।
चले चलो निज राह तू, करना नही विश्राम ।
तेरी मंजिल दूर है, रखो काम से काम ।।
जीत हार में एक ही, अंतर होते सार ।
मंजिल पाना सार है, बाकी सब बेकार ।।
जान बूझ कर लोग क्यूं, चल पड़ते उस राह ।
तन मन करते खाक जो, करके उसकी चाह ।।
जग में भागम भाग है, भागें हैं हर कोय ।
कोई ढ़ूंढ़े प्यार हैं, शांति शोहरत कोय ।।
रीत प्रीत की है सहज, मत कर तू अभिमान ।
अपनों के संबंध में, तोड़ दे स्वाभिमान ।।
संस्कृत भाषा रम्य है, माने सकल जहाॅन ।
संस्कृत भाषा बोल कर, गढ़ लो अपनी शान ।।
बीते दिन बहुरे नहीं, यही जगत की रीत ।।
चले चलो निज राह तू, करना नही विश्राम ।
तेरी मंजिल दूर है, रखो काम से काम ।।
जीत हार में एक ही, अंतर होते सार ।
मंजिल पाना सार है, बाकी सब बेकार ।।
जान बूझ कर लोग क्यूं, चल पड़ते उस राह ।
तन मन करते खाक जो, करके उसकी चाह ।।
जग में भागम भाग है, भागें हैं हर कोय ।
कोई ढ़ूंढ़े प्यार हैं, शांति शोहरत कोय ।।
रीत प्रीत की है सहज, मत कर तू अभिमान ।
अपनों के संबंध में, तोड़ दे स्वाभिमान ।।
संस्कृत भाषा रम्य है, माने सकल जहाॅन ।
संस्कृत भाषा बोल कर, गढ़ लो अपनी शान ।।
कैसे हम आजाद हैं...
कैसे हम आजाद हैं, है विचार परतंत्र ।
अपने पन की भावना, दिखती नहीं स्वतंत्र ।।
अपने पन की भावना, दिखती नहीं स्वतंत्र ।।
भारतीयता कैद में, होकर भी आजाद ।
अपनों को हम भूल कर, करते उनको याद ।
छुटे नही हैं छूटते, उनके सारेे मंत्र । कैसे हम आजाद हैं....
अपनों को हम भूल कर, करते उनको याद ।
छुटे नही हैं छूटते, उनके सारेे मंत्र । कैसे हम आजाद हैं....
मुगल आक्रांत को सहे, सहे आंग्ल उपहास ।
भूले निज पहचान हम, पढ़ इनके इतिहास ।।
चाटुकार इनके हुये, रचे हुये हैं तंत्र । कैसे हम आजाद हैं...
भूले निज पहचान हम, पढ़ इनके इतिहास ।।
चाटुकार इनके हुये, रचे हुये हैं तंत्र । कैसे हम आजाद हैं...
निज संस्कृति संस्कार को, कहते जो बेकार ।
बने हुये हैं दास वो, निज आजादी हार ।।
जाने कैसे लोग वो, कहते किसे सुतंत्र । कैसे हम आजाद हैं...
बने हुये हैं दास वो, निज आजादी हार ।।
जाने कैसे लोग वो, कहते किसे सुतंत्र । कैसे हम आजाद हैं...
आजादी के नाम पर, जो जन हुये कुर्बान ।
उनसे पूछे कौन अब, उनके ओ अरमान ।।
लड़े लड़ाई क्यों भला, ले आजादी मंत्र । कैसे हम आजाद हैं.....
उनसे पूछे कौन अब, उनके ओ अरमान ।।
लड़े लड़ाई क्यों भला, ले आजादी मंत्र । कैसे हम आजाद हैं.....
वीर सपूतों से कहे,शहीद वीर सपूत ।
दे दो सुराज तुम हमें, अपनेपन अभिभूत ।।
देश धर्म पर नाज हो, गढ़ दो ऐसे तंत्र । कैसे हम आजाद हैं.....
दे दो सुराज तुम हमें, अपनेपन अभिभूत ।।
देश धर्म पर नाज हो, गढ़ दो ऐसे तंत्र । कैसे हम आजाद हैं.....
झूमे बच्चे हिन्द के, लिये तिरंगा हाथ
झूमे बच्चे हिन्द के,
लिये तिरंगा हाथ ।
हम भारत के लाल है, करते इसे सलाम ।
पहले अपना देश है, फिर हिन्दू इस्लाम ।।
देश धर्म ही सार है, बाकी सभी अकाथ । झूमे......
यहां वहां देख लो, करते सब यशगान ।।
आंच आय ना देष को, करे शपथ सम्मान ।।
मातृृभूमि के हेतु हम , अर्पण करते माथ । झूमे......
भारत मां के पूत हम, भारतीय है नाम ।
मातृभूमि के हेतु ही, करते सारे काम ।।
भांति भांति के लोग, मिलकर रहते साथ । झूमे......
समरसता सम भाव का, अनुपम है सौगात ।
ईद दिवाली साथ में, सारे जहां लुभात ।।
हिन्दी उर्दू बोल है, अपने अपने माथ । झूमे......
लिये तिरंगा हाथ ।
हम भारत के लाल है, करते इसे सलाम ।
पहले अपना देश है, फिर हिन्दू इस्लाम ।।
देश धर्म ही सार है, बाकी सभी अकाथ । झूमे......
यहां वहां देख लो, करते सब यशगान ।।
आंच आय ना देष को, करे शपथ सम्मान ।।
मातृृभूमि के हेतु हम , अर्पण करते माथ । झूमे......
भारत मां के पूत हम, भारतीय है नाम ।
मातृभूमि के हेतु ही, करते सारे काम ।।
भांति भांति के लोग, मिलकर रहते साथ । झूमे......
समरसता सम भाव का, अनुपम है सौगात ।
ईद दिवाली साथ में, सारे जहां लुभात ।।
हिन्दी उर्दू बोल है, अपने अपने माथ । झूमे......
वीर शहीदो को नमन
वीर शहीदो को नमन, कर लो देव समान ।
जिनके कारण आपका, हुआ मान सम्मान ।।
सीमा पर जो हैं डटे, रखेे हथेली प्राण ।
याद करो उनको भला, देकर थोड़ा मान ।।
अंत समय जय हिन्द के, मंत्र लिये जो बोल ।
उनके निज परिवार का, ध्यान रखो दिल खोल ।।
.हर मजहब से है बड़ा, देश भक्ति का धर्म ।
आन बान तो देश है, समझों इसका मर्म ।।
आजादी के यज्ञ में, किये लोग जो होम ।
उनकी आहुति पुण्य ही, रचे बसे हों रोम ।।
जिनके कारण आपका, हुआ मान सम्मान ।।
सीमा पर जो हैं डटे, रखेे हथेली प्राण ।
याद करो उनको भला, देकर थोड़ा मान ।।
अंत समय जय हिन्द के, मंत्र लिये जो बोल ।
उनके निज परिवार का, ध्यान रखो दिल खोल ।।
.हर मजहब से है बड़ा, देश भक्ति का धर्म ।
आन बान तो देश है, समझों इसका मर्म ।।
आजादी के यज्ञ में, किये लोग जो होम ।
उनकी आहुति पुण्य ही, रचे बसे हों रोम ।।
शर्मसार है धर्म
अपना दामन छोड़ कर, देखे सकल जहान ।
दर्शक होते लोग ये, बनते नही महान ।।
उपदेशक सब लोग है, सुने कौन उपदेश ।
मुखशोभा उपदेश है, चाहे कहे ‘रमेश‘ ।।
परिभाषा है धर्म का, धारण करने योग्य ।
मन वाणी अरू कर्म से, सदा रहे जो भोग्य ।।
धरे धर्म के मर्म को, मानस पटल समेट ।
प्राणी प्राणी एक सा, सबके दुख तू मेट ।।
भेड़ बने वे लोग क्यों, चले एक ही राह ।
आस्था के मंड़ी बिके, लिये मुक्ति की चाह ।।
तार-तार आस्था हुई, शर्मसार है धर्म ।
बाबा गुरू के नाम से, आज किये दुष्कर्म ।।
छोड़ दिये निज मूल को, साखा बैठे जाय ।
साखा होकर फिर वही, खुद को मूल बताय ।।
दर्शक होते लोग ये, बनते नही महान ।।
उपदेशक सब लोग है, सुने कौन उपदेश ।
मुखशोभा उपदेश है, चाहे कहे ‘रमेश‘ ।।
परिभाषा है धर्म का, धारण करने योग्य ।
मन वाणी अरू कर्म से, सदा रहे जो भोग्य ।।
धरे धर्म के मर्म को, मानस पटल समेट ।
प्राणी प्राणी एक सा, सबके दुख तू मेट ।।
भेड़ बने वे लोग क्यों, चले एक ही राह ।
आस्था के मंड़ी बिके, लिये मुक्ति की चाह ।।
तार-तार आस्था हुई, शर्मसार है धर्म ।
बाबा गुरू के नाम से, आज किये दुष्कर्म ।।
छोड़ दिये निज मूल को, साखा बैठे जाय ।
साखा होकर फिर वही, खुद को मूल बताय ।।
Popular Posts
-
मानवता हो पंगु जब, करे कौन आचार । नैतिकता हो सुप्त जब, जागे भ्रष्टाचार ।। प्रथा कमीशन घूस हैे, छूट करे सरकार । नैतिकता के पाठ का,...
-
जिसे भाता ना हो, छल कपट देखो जगत में । वही धोखा देते, खुद फिर रहे हैं फकत में ।। कभी तो आयेगा, तल पर परिंदा गगन से । उड़े चाहे ऊॅचे, मन...
-
चरण पखारे शिष्य के, शाला में गुरू आज । शिष्य बने भगवान जब, गुरूजन के क्या काज ।। गुरूजन के क्या काज, स्कूल में भोजन पकते । पढ़ना-लिखना छ...
-
गणेश वंदना दोहा - जो गणपति पूजन करे, ले श्रद्धा विश्वास । सकल आस पूरन करे, भक्तों के गणराज ।। चौपाई हे गौरा गौरी के लाला । हे ल...
-
योग दिवस के राह से, खुला विश्व का द्वार । भारत गुरू था विश्व का, अब पुनः ले सम्हार ।। गौरव की यह बात है, गर्व करे हर कोय । अपने ही इस...
-
25.10.16 एक मंत्र है तंत्र का, खटमल बनकर चूस। झोली बोरी छोड़कर, बोरा भरकर ठूस ।। दंग हुआ यह देख कर, रंगे उनके हाथ । मूक बधिर बन आप ही, ...
-
लोकतंत्र के राज में, जनता ही भगवान । पाॅंच साल तक मौन रह, देते जो फरमान । द्वार द्वार नेता फिरे, जोड़े दोनो हाथ । दास कहे खुद को सदा, म...
-
चीं-चीं चिड़िया चहकती, मुर्गा देता बाँग । शीतल पवन सुगंध बन, महकाती सर्वांग ।। पुष्पकली पुष्पित हुई, निज पँखुडियाँ प्रसार । उद...
-
प्रेम का मै हू पुजारी, प्रेम मेरा आन है । प्रेम का भूखा खुदा भी, प्रेम ही भगवान है ।। वासना से तो परे यह, शुद्ध पावन गंग है । जीव में जी...
-
दी प ऐसे हम जलायें, जो सभी तम को हरे । पा प सारे दूर करके, पुण्य केवल मन भरे ।। व क्ष उर निर्मल करे जो, सद्विचारी ही गढ़े । ली न कर मन ध्...
Categories
- अतुकांत (15)
- अध्यात्म (1)
- अनुष्टुप छंद (1)
- अमृत ध्वनि (4)
- आल्हा छंद (4)
- उल्लाल छंद (2)
- उल्लाला छंद (5)
- कहमुकरियां छंद (3)
- कुंडलियां (4)
- कुकुभ छंद (5)
- कुण्डलियां (105)
- गंगोदक सवैया (1)
- गजल (6)
- गीत (5)
- गीतिका छंद (8)
- घनाक्षरी (3)
- घनाक्षरी छंद (9)
- चवपैया छंद (2)
- चिंतन (4)
- चोका (16)
- चौपाई (4)
- चौपाई गीत (1)
- चौपाई छंद (6)
- चौबोला (1)
- छंद माला (1)
- छंदमाला (1)
- छन्न पकैया छंद (3)
- छप्पय छंद (5)
- तांका (7)
- तुकबंदी (2)
- तुकांत (21)
- त्रिभंगी छंद (7)
- त्रिवेणी (1)
- त्रिष्टुप छंद (1)
- दुर्मिल सवैया (1)
- देशभक्ति (10)
- दोहा (6)
- दोहा मुक्तक (4)
- दोहा-गीत (12)
- दोहे (99)
- नवगीत (11)
- नारी (1)
- पद (1)
- भजन (5)
- माहिया (1)
- मुक्तक (11)
- राजनैतिक समस्या (3)
- राधिका छंद (1)
- रूपमाला छंद (2)
- रोला छंद (4)
- रोला-गीत (2)
- वर्ण पिरामिड (7)
- विविध (1)
- शक्ति छंद (3)
- शब्दभेदी बाण (3)
- शिखरिणी छंद (1)
- शोभन (3)
- श्रृंगार (2)
- सजल (1)
- सरसी छंद (7)
- सवैया (1)
- सामाजिक समस्या (12)
- सार छंद (16)
- सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक (6)
- हरिगीतिका (1)
- हाइकू (4)
- mp3 (6)










