जनता मेरे देश का, दिखे विवश लाचार ।
अँकुश व्यपारी पर नहीं, सौ का लिए हजार ।।
सौ का लिए हजार, सभी लघु दीर्घ व्यपारी ।
लाभ नीति हो एक, देश में अब सरकारी ।।
कितना लागत मूल्य, बिक्री का कितना तेरे ।
ध्यान रखें सरकार, विवश हैं जनता मेरे ।।
जनता मेरे देश का, दिखे विवश लाचार ।
अँकुश व्यपारी पर नहीं, सौ का लिए हजार ।।
सौ का लिए हजार, सभी लघु दीर्घ व्यपारी ।
लाभ नीति हो एक, देश में अब सरकारी ।।
कितना लागत मूल्य, बिक्री का कितना तेरे ।
ध्यान रखें सरकार, विवश हैं जनता मेरे ।।
मुखड़ा करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम हारे का सहारा श्याम, भवकूप का उजागर हो तुम करुणा करो हे खाटू श्याम, दया के सागर हो तुम म...
0 Comments:
एक टिप्पणी भेजें