दर्पण सुनता देखता, जग का केवल सत्य ।
आँख-कान से वह रहित, परखे है अमरत्व ।।
परखे है अमरत्व, सत्य को जो है माने ।
सत्य रूप भगवान, सत्य को ही जो जाने ।।
सुनलो कहे ‘रमेश‘, करें सच को सच अर्पण ।
आँख-कान मन खोल, बनें हर कोई दर्पण ।।
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