नीले नभ से उदित हुई तुम,
नूतन किरणों सी छाई।
ओठो पर मुस्कान समेटे,
सुधा कलश तुम छलकाई ।।
निर्मल निश्चल निर्विकार तुम,
परम शांति को बगराओ ।
बाहों में तुम खुशियां भरकर,
मेरी बाहो में आओ।।
-रमेश चौहान
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