द्वारिका पुरी सुहानी रे भैया
नही कोई इसका सानी है ।
बांके बिहारी तो यहां है रहते-2
जहां उसकी राजधानी है ।।
सागर श्याम को जगह है दीन्हो
विश्वकर्मा ने यह रचना है कीन्हो
कान्हा अपना वास जहां है लीन्हो
वसे है जहां उसके पटरानी रे भैया
नही कोई इसका सानी है ।
ऊंचे ऊंचे जहां महल अटारी
रथ घोड़े का अद्भूत सवारी
देखे भौचक्क सुदामा संगवारी
आंख भर आये हैं पानी...
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
ग्वाला रे गोकुल के
हाहा हाहा हाहा
गोकुल के ग्वाला, गोकुल के ग्वाला
छेड़े है मुख लगाये घोले रे हाला मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे रे मुरली से
मुरली से कोई बाचे न बचे...
बड़ा तंग किना (भजन)
ओ मईयाजी ........
बड़ा तंग किन्हा
तेरे किसन ने बड़ा तंग किना -2
दूध दही चुराये, संग साथी बुलाये,
घर घुस चढ़ जावे ये जिना
बड़ा तंग किन्हा
तेरे किसन ने बड़ा तंग किना
ओ मईयाजी ........
बड़ा तंग किन्हा
ओ ग्वाला है हम ग्वालिन हैं-2
ओ बगिया है हम मालिन हैं
तेरे घर में माखन, खूब होगी मगर
उसने मेरा माखन छिना
बड़ा तंग किना 2
तेरे किसन ने बड़ा तंग किना
बड़ा...
नेताजी की महिमा गाथा (आल्हा)
नेताजी की महिमा गाथा, लोग भजन जैसे है गाय ।
लोकतंत्र के नायक वह तो, भाव रंग रंग के दिखाय ।।
नटनागर के माया जैसे, इनके माया समझ न आय ।
पल में तोला पल में मासा, कैसे कैसे रूप बनाय ।।
कभी कभी जनता संग खड़े, जन जन के मसीहा कहाय ।
मुफ्त बांटते राशन पानी, लेपटाप बिजली भरमाय ।
कभी मंहगाई पैदा कर, दीन दुखीयों को तड़पाय ।
बांट बेरोजगारी भत्ता, युवा शक्ति...
कर्तव्य क्या है ?
कर्तव्य क्या है ?
कोई नही जानते
ऐसा नही है
कोई नही चाहते
कांटो पर चलना ।
स्वार्थ के पर
एक मानव अंग
मानवीकृत
मांगते अधिकार
कर्तव्य भूल कर ।
लड़े लड़ाई
अधिकारों के लिये
अच्छी बात है
रखें याद यह भी
कुछ...
काले धन का हल्ला
छन्न पकैया छन्न पकैया, काले धन का हल्ला ।
चोरों के सरदारों ने जो, भरा स्वीस का गल्ला ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, कौन जीत अब लाये ।
चोर चोर मौसेरे भाई, किसको चोर बताये ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, सपना बहुत दिखाये ।
दिन आयेंगे अच्छे कह कह, हमको तो भरमाये ।।
छन्न पकैया छन्न पकैया, धन का लालच छोड़ो ।
होते चार बाट चोरी धन, इससे मुख तुम मोड़ो ।।
छन्न पकैया...
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