शुक्रवार, 17 मार्च 2017

इतिहास में दबे पड़े हैं काले हीरे मोती

इतिहास में दबे पड़े हैं
काले हीरे मोती

अखण्ड़ भारत का खण्डित होना
किया जिसने स्वीकार
महत्वकांक्षा के ढोल पीट कर
करते रहे प्रचार

आजादी के हम जनक हैं
सत्ता हमारी बापोती

धर्मनिरपेक्षता को संविधान का
जब गढ़ा गया था प्राण
बड़े वस्त्र को काट-काट कर
क्यों बुना फिर परिधान

पैजामा तो हरपल साथ रहा पर
उपेक्षित रह गया धोती

जात-पात, भाषा मजहब में
फहराया गया था तिरंगा
क्यों कर देष में होता रहा
फिर अबतक मजहबी दंगा

वोट बैंक के कलम लिये
करते रह गये लीपा-पोती

आरक्षण अनुदान समता की सीढ़ी
बना गया एक हथियार
दीन-हीनों के हिस्से के दाने
खाते रह गये होषियार

भूल सफलता की कुंजी है
करें स्वीकार चुनौती

एक टिप्पणी भेजें