बुधवार, 19 जुलाई 2017

ईश्वर अल्ला नाम एक है

ये अल्ला के बंदे सुन लो, सुन लो ईश्वर के संतान ।
ईश्वर अल्ला नाम एक है, सुन लो अपने खोले कान ।।

निराकार साकार रूप तो, कण-कण का होता पहिचान ।
फल का रंग-रूप जगजाहिर, कौन स्वाद का देवे प्रमान ।।

प्रतिरूप फलों का दिखता है, स्वाद रहे जस तन में प्राण ।
स्वाद बिना फल होवे कैसा, फल बिन स्वाद चढ़े परवान ।।

जर्रा-जर्रा अल्ला बसता, कण-कण में होते भगवान ।
सूफी संत पीर पैगम्बर, महापुरूष अवतारी प्राण ।।

दुनिया के ओ हर दुख मेटे, मानव को केवल मानव मान ।
किये इबादद मानवता के, कर मानवता के गुणगान ।।

मानवता ही धर्म बड़ा है, मानव को माने भगवान ।
दोजक-जन्नत स्वर्ग-नरक को, ठौर कर्मफल का ही जान ।

कर्मलोक में कर्म करें सब, ईश्वर अल्ला का फरमान ।
दूजे को पीर नही देना, कर्म इसे ही अपना जान

शनिवार, 15 जुलाई 2017

शिवशंकर ओम

बोल बम्म के गूंज से, गूंज रहा है व्योम ।
जय जय भोलेनाथ जय, जय शिवशंकर ओम ।

आदि देव ओंकार शिव, सकल सृष्टि के कंत ।
जगत उपेक्षित जीव के, प्रियवर शिव भगवंत ।।

महाकाल अवलंब जग, जीवन शाश्वत सत्य ।
निराकार ओंकार शिव, रूप गूढ़ आनंत्य ।।

जटा सोम गंगा पुनित, आदि शक्ति अर्धांग ।
नील वर्ण ग्रीवा गरल, जग व्यापक धवलांग ।।

कंठ ब्याल अँग भस्म रज, हस्त बिच्छु विष डंक ।
संग भूत बेताल बहु, फिर भी भक्त निशंक ।।

आषुतोष शंकर सरल, अवघरदानी देव ।
श्रद्धा अरु विश्वास धर, भक्त करें हैं सेव ।।

चरण-शरण प्रभु लीजिये, हम माया आसक्त ।
पूजन विधि जाने नही, पर हैं तेरे भक्त ।।

बुधवार, 12 जुलाई 2017

हे भारत के भाग्य विधाता

हे भारत के भाग्य विधाता, मतदाता भगवान ।
नेताओं के कर्मों पर भी, देना प्रभु कुछ ध्यान ।।

देश आपका स्वामी आपहि, समरथ सकल सुजान ।
नेता नौकर-चाकर ठहरे, राजा आप महान ।।

देश आपको गढ़ना स्वामी, रख कर इसको एक ।
नौकर-चाकर ऐसे रखिये, वफादार अरु नेक ।।

शक्ति आपके पाकर के जो, केवल करते ऐश ।
निर्धन से जो धनवान हुये, बेच बेच कर देश ।।

जात-पात के खोदे खाई, ऊँच-नीच कॆ कूप ।
आतंकी और नक्सली भी, पालें हैं जो छूप ।।

जागें जागें हे जनार्दन, छोड़ें शैय्या शेष ।
हाथ सुदर्शन लेकर के प्रभु, मेटें सारे क्लेष ।।

-रमेश चौहान

मंगलवार, 11 जुलाई 2017

एक-एक की छाती फाड़ों, बचे न अत्याचारी

रोना-धोना छोड़ करें अब, बदले की तैयारी ।
एक-एक की छाती फाड़ों, बचे न अत्याचारी ।

अमरनाथ के भक्तों को जो, घात लगा कर मारे ।
आजादी या जेहादी के, जो लगा रहे नारे ।।

कश्मीर हमारे पुरखों का, नही बाप के उनके ।
धर्म नही है कोई कमतर, हमको समझे तिनके ।।

छुप-छुप कर जो आतंकी बन, करते हैं बमबारी ।
एक-एक की छाती फाड़ों, बचे न अत्याचारी ।।

सरहद के रखवालों को, जो छुप-छुप कर मारे ।
जिनके हाथों पर हैं पत्थर, आतंकी हैं सारे ।।

राष्ट्र धर्म ही धर्म बड़ा है, जो बात न यह माने ।
ऐसे दुष्टों को तो केवल, शत्रु राष्ट्र का जाने ।।

ऐसे बैरीयों से लड़ने, तोड़ो हर लाचारी ।
एक-एक की छाती फाड़ों, बचे न अत्याचारी ।

जो बैरी हो बाहर का या, विभिषण होवे घर का ।
जो भगवा चोला धारे या, ओढ़ रखें हो बुरका ।।

छद्म धर्म निरपेक्षी बनकर, जो करते नौटंकी ।
खोज निकालो ऐसे बैरी, जो पाले आतंकी ।।

बहुत सहे आतंकी सदमा, अब है उनकी बारी
एक-एक की छाती फाड़ों, बचे न अत्याचारी ।


चलो चाल सरकार, बचे ना अब आतंकी

आतंकी करतूत से, दहल रहा कश्मीर ।
पोषित कुलषित सोच से, सींच रहें हैं पीर ।।
सींच रहें हैं पीर, रूप आतंकी धारे ।
जन्नत में शैतान, आदमीयत को मारे ।।
छुप-छुप करते वार, चाल चलते हैं बंकी ।
चलो चाल सरकार, बचे ना अब आतंकी ।।

दुष्टों का संघार, करें अब हे शिव भोले

हे शिव भोले नाथ प्रभु, देखें नयन उघार ।
तेरे भक्तों पर हुआ, फिर से अत्याचार ।
फिर से अत्याचार, शत्रु मानव के करते ।
देव विरोधी दैत्य, प्राण भक्तों के हरते ।।
अमरनाथ के नाथ, भक्त हर-हर हर बोले ।
दुष्टों का संघार, करें अब हे शिव भोले ।।

गुरुवार, 6 जुलाई 2017

रक्तों का प्यासा हुआ, भेड़ों का वह भीड़

रक्तों का प्यासा हुआ, भेड़ों का वह भीड़ ।
अफवाहों में जल रहे, निर्दोषों का नीड़ ।।
निर्दोषों का नीड़,  बचे चिंता है किसको ।
जनता बकरी-भेड़, आज लगते हैं जिसको ।
खरी-खरी इक बात, कहें उन अनुशक्तों का ।
फँसे लोभ के फाँस, , हुये प्यासे रक्तों का।