मंगलवार, 5 जुलाई 2016

अस्पताल में

गुंज रहीं हैं सिसकियां
रूदन, क्रन्दन, आहें
मरीजो के
रोगो से जुझते हुये
अस्पताल में ।

अट्हास कर रहा है,
मौत
अपने बाहों में भरने बेताब
हर किसी को, हर पल
अस्पताल में ।

किसी कोने पर
दुबकी बैठी है
जिंदगी
एक टिमटिमाते
लौ की तरह
अस्पताल में ।

द्वंद चल रहा है
जीवन और मौत में
आशा और निराशा में
घने अंधेरे को चिर सकता है
धैर्य का मंद दीपक
अस्पताल में ।

धैर्य और आशा के अस्त्र ले
निरंतर लड़ रहें हैं
मौत को परास्त करने
परम योद्धा
चिकित्सक
अस्पताल में ।

मौत प्रबल होकर भी,
परास्त हो रहा
चाहे कभी कभी
विजयी एहसास करे
असत्य की तरह
अस्पताल में ।

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