शनिवार, 25 जुलाई 2015

कुछ दोहे

1. रह रह कर मैं सोचता, बैठे बैठे मौन ।
करे खोखला देश को, आखिर है वह कौन ।।

2 .देश भक्ति का राग सुन, मैं रहता हूॅ मुग्ध ।
दशा देख कर देश की, हो जाता हूॅॅ क्षुब्ध ।।

3 .तुुम सा ही हूॅ मैं यहां, रखे हाथ पर हाथ ।
बैठा साधे मौन हूॅ, देते उनको साथ ।।

4 .ढोल रखे संस्कार का, बजा रहा है कौन ।
सुन कर तेरे शोर को, वह क्यों बैठा मौन ।।

5. परम्परा की बात को, डाले कारागार ।
संस्कृति के उत्थान पर, लाख खर्चे सरकार ।।

6. बंद पड़े गुरूकुल यहां, जाये सब कान्वेंट ।
अपने घर को छोड़ कर, बनते हैं सरवेंट ।।

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