शनिवार, 21 सितंबर 2013

कुण्डलियां


1.गणेश वंदना
प्रथम पूज्य गणराज हे, बारम्बार प्रणाम ।
विघ्न विनाश्‍ाक आप हैं, गणपति तेरो नाम ।।
गणपति तेरो नाम, उमा श्‍िाव के प्रिय नंदन ।
सकल चराचर मान, किये माॅ पितु का वंदन ।।
बुद्धि दाता गणेश, ध्यान रखना हरदम  ।
चरणन पड़ा ‘रमेश‘, किये मन समर्पण प्रथम ।।
2. सरस्वती वंदना
वीणा की झंकार से, भरें राग उल्लास ।
अज्ञान निशा नाश कर, देवें ज्ञान उजास ।।
देवें ज्ञान उजास, शारदे तुझे मनावें ।
ले श्रद्धा विश्वास, चरण में भेट चढ़ावें ।।
करे पुकार ‘रमेश‘, दया कर मातु प्रवीणा ।
करें दूर  अज्ञान, छेड़ कर अपनी वीणा।।

3. मंजिल
मंजिल छूना दूर कब, चल चलिए उस राह ।
काम कठिन कैसे भला, जब करने की चाह ।
जब करने की चाह, गहन कंटक पथ जावे ।
करे कौन परवाह, कर्मगति मनवा भावे।।
जीवन में कर कर्म, बनो सब बिधि तुम काबिल ।
कह ‘रमेश‘ समझाय, कर्म पहुंचाए मंजिल ।।


4. हिन्दी
हिन्दी बेटी हिन्द की, ढूंढ रही सम्मान ।
ग्राम नगर व गली गली, धिक् धिक् हिन्दुस्तान ।
धिक् धिक् हिन्दुस्तान, दासता छोड़े कैसे ।
सामंती पहचान, बेडि़याँ तोड़े कैसे।।
कह ‘रमेश‘ समझाय, बना माथे की बिन्दी ।
बन जा धरतीपुत्र, बड़ी ममतामय हिन्दी ।।


5.दादा पोता
दादा पोता हैं चले,  मन से मन को जोर ।
सांझ एक ढलता हुआ, दूजा नवीन भोर ।।
दूजा नवीन भोर, उमंगे नई जगावे ।
ढलता वह तो सांझ, धूप का स्वाद बतावे ।।
मध्य निशा घनघोर, डरावन होते ज्यादा ।
भेदे कैसे रात, राज खोले हैं दादा ।।


6.    महंगाई
बढ़े महंगाई यहां, धर सुरसा परिधान।
परख रहे हमको खरा , कौन बने हनुमान ।।
कौन  बने हनुमान, सेतु डालर जो लांघे ।
क्यों रूपया कमजोर, इसे तो कोई बांधे  ।।
सुझता नही ‘रमेश्‍ा‘, जिंदगी कैसे गढें।
दाल भात का भाव, यहां जब ऐसे बढ़े ।।

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