शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

गणेश स्तुति

                                  गणेश स्तुति
दोहा -    जो गणपति  पूजन करे,  ले श्रद्धा विश्वास ।
           सकल आस पूरन करे,  भक्तों के गणराज ।।

                    चौपाई
हे गौरा गौरी के लाला । हे लंबोदर दीन दयाला । ।
सबसे पहले तेरा सुमरन । करते है हम वंदन पूजन ।1।।

हे प्रभू बुद्धि विद्या दाता । भक्तों के तुम भाग्य विधाता
वेद पुराण सभी गुण गाये। तेरी महिमा भक्त सुनाये ।।2।।

माता धरती  पिता आकाश । जगत को दिये ज्ञान प्रकाश
अति प्रसन्न हो पिता महेश । बना दिये तब तुम्हे गणेश ।।3।।

जो भक्त ले कर तेरा नाम । जब जब शुरू करे अपना काम
सकल काम निर्वघ्न होय सफल । सब बाधा हो जाये असफल ।।4।।

हे वक्रतुण्ड़ देव गजानन । मूशक वाहन लगे सुहावन
जय जय लंबोदर जग पावन । तेरा रूप मनोहर मन भावन ।।5।।

मां की ममता तोहे भावे । मोदक भोग तोहे रिझावे
बाल रूप बालको को भाये । मंगल मूर्ति सदा मन भाये ।।6।।

हे एकदन्त कृपा कीजिये । सद़विचार सद़बुद्वि दीजिये ।
हे विनायक कर पूरन काम । भक्त पुकारे नित सुबह शाम ।।7।।

हे मेरे आखर के देवता । ‘रमेश‘ भेजे प्रथम न्योता
मेरी लेखनी लो सम्हाल । लेखनी है अभी नवनिहाल ।।8।।

अपने पुरखा अरू माटी के । अपने जंगल अरू घाटी के
करू चित्रण मै सम्मान सहित । सदा रहू मै अभिमान रहित ।।9।।

यशगान गाये सारद शेष । जय जय जय जय गौरी गणेश।
हे रिद्धी सिद्धी के दाता । अब दुख मेटो भाग्य विधाता ।।10।।


दोहा-        जब जब भक्त शरण गहे, मेटे सकल कलेष ।
              बाधाओ को दूर करे, मंगल मूर्ति  गणेश ।।
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