गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

आखिर क्यों ??

देर है अंधेर नहीं
जन्म से अब तक
सुनते आ रहे हैं
एक प्रश्न
छाती तान कर खड़ा है
न्याय में देरी होना क्या न्याय हैं ?
एक प्रश्न खड़ा  है
आरोपियों को दोषियों की तरह
सजा क्यों दी जाती है ?
क्या सभी आरोपी दोषी सिद्ध होते है ?
यदि हां तो
वर्षों तक कोर्ट का चक्कर क्यों ?
यदि नहीं तो
आरोपी के अनमोल वर्ष जो जेल में बीते,
दुख अपमान कष्ट में बीते,
उन क्षणों का भुगतान कौन करे ?
क्या कभी
झूठे आरोप लगाने वालों को सजा हुई है ?
क्या कोई कभी
इस सिस्टम पर प्रश्न खड़ा किया है ?
क्या कोई संगठन
उन निर्दोष आरोपियों के पक्ष में
प्रदर्शन किया है ?
सभी आरोपी दोषी नहीं होते
तो क्यों
आरोपियों को दोषियों की भांति सजा दी जाती है
क्यों क्यों क्यों
आखिर क्यों ?????

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