रविवार, 1 अप्रैल 2018

जीने की कला

जग में जीने की कला,  जग से लेंवे सीख ।
जीवन जीने की कला, मिले न मांगे भीख  ।।
मिले न मांगे भीख,  सफलता की वह  कुंजी ।
व्यक्ति वही है सफल,  स्वेद श्रम जिनकी पूंजी ।।
चलते रहो "रमेश",  रक्त बहते ज्यो  रग में ।
चलने का यह काम, नाम है जीवन जग में ।।

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