बुधवार, 12 जुलाई 2017

हे भारत के भाग्य विधाता

हे भारत के भाग्य विधाता, मतदाता भगवान ।
नेताओं के कर्मों पर भी, देना प्रभु कुछ ध्यान ।।

देश आपका स्वामी आपहि, समरथ सकल सुजान ।
नेता नौकर-चाकर ठहरे, राजा आप महान ।।

देश आपको गढ़ना स्वामी, रख कर इसको एक ।
नौकर-चाकर ऐसे रखिये, वफादार अरु नेक ।।

शक्ति आपके पाकर के जो, केवल करते ऐश ।
निर्धन से जो धनवान हुये, बेच बेच कर देश ।।

जात-पात के खोदे खाई, ऊँच-नीच कॆ कूप ।
आतंकी और नक्सली भी, पालें हैं जो छूप ।।

जागें जागें हे जनार्दन, छोड़ें शैय्या शेष ।
हाथ सुदर्शन लेकर के प्रभु, मेटें सारे क्लेष ।।

-रमेश चौहान

एक टिप्पणी भेजें