गुरुवार, 26 जनवरी 2017

आज पर्व गणतंत्र का

आज पर्व गणतंत्र का, मना रहा है देश ।
लोक कहां है तंत्र में, दिखे नहीं परिवेश ।।
बना हुआ है स्वप्न वह, देखे थे जो आँख ।
जन मन की अभिलाष सब, दबा तंत्र के काख ।।
निर्धन निर्धन है बना, धनी हुये धनवान ।
हिस्सा है जो तंत्र का, वही बड़ा बलवान ।।
-रमेश चौहान

गुरुवार, 12 जनवरी 2017

कहे विवेकानंद

पाना हो जो लक्ष्य को, हिम्मत करें बुलंद ।
ध्येय वाक्य बस है यही, कहे विवेकानंद ।।
कहे विवेकानंद, रूके बिन चलते रहिये ।
लक्ष्य साधने आप, पीर तो थोड़ा सहिये ।
विनती करे ‘रमेश‘, ध्येय पथ पर ही जाना ।
उलझन सारे छोड़, लक्ष्य को जो हो पाना ।।

सोमवार, 9 जनवरी 2017

//ममता स्मृति क्लब नवागढ, जिला बेमेतरा//


(उल्लाला छंद)

ममता स्मृति क्लब अति पुनित, ममता का ही मर्म है ।
प्रेम स्नेह ही बांटना, इसका पावन धर्म है ।।

डॉक्टर अजीत प्रेम से, घुले मिले थे गांव में ।
डॉक्टर हो वह दक्ष थे, कई खेल के दांव में ।।

प्यारी सुता अजीत की, प्यारी थी इस गांव को ।
सात वर्ष की आयु में, जो तज दी जग ठांव को ।।

उस ममता की स्मृति में, ग्रामीणों का कर्म है ।
जाति धर्म अंतर रहित, समरसता का मर्म है ।

शान नवागढ़ का यही, हम सबका मान है ।
चवालीस से अब तलक, बना हुआ पहचान है ।।

खेल-खेल में प्रेम का, सुधा नीर बरसा रही ।
बाल जवा अरू वृद्ध को, आज तलक हरषा रही । ।

खेल संगठन ही नही, यह इक केवल खेल का ।
सामाजिक संस्था रहा, ग्रामीणों के मेल का ।।

खेल कबड्डी खेल कर, रचा एक इतिहास है।
खेले वॉलीवाल भी, जिनका आज प्रकाश है ।।

नेत्र शिविर रचकर कभी, सुयश किये हैं गांव में ।
रक्तदान करके अभी, नाम किये हैं ठांव में ।।

खास आम सब गांव के, निर्धन अरू धनवान भी ।
सेवा करने आय जो, गांव के मेहमान भी ।

गढ़े पाठ सौहार्द के, ममता क्लब के हाथ हो।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख अरू, ईसाई सब साथ हो ।

जाने है इस मर्म को, खेल भावना धर्म है ।
समरसता बंधुत्व ही, ममता क्लब का कर्म है ।

शनिवार, 7 जनवरी 2017

गणेशजी की आरती

जय गौरी नंदन, विघ्न निकंदन, जय प्रथम पूज्य, भगवंता ।
जय शिव के लाला, परम दयाला, सुर नर मुनि के, प्रिय कंता ।।

मध्य दिवस सुचिता, भादो पुनिता, शुक्ल चतुर्थी, शुभ बेला ।
प्रकटे गणनायक, मंगल दायक, आदि शक्ति के, बन लेला ।।

तब पिता महेशा, किये गणेशा, करके गजानन, इक दंता ।
जय गौरी नंदन, विघ्न निकंदन, जय प्रथम पूज्य, भगवंता ।।

रिद्धि सिद्धि द्वै, हाथ चवर लै, निशदिन करतीं, हैं सेवा ।
तुहरे शरण खड़े, जयकार करे, तैतीस कोटि, सब देवा ।।

प्रभु दर पर तेरे, शाम सबेरे, माथा टेके, सब संता ।
जय गौरी नंदन, विघ्न निकंदन, जय प्रथम पूज्य, भगवंता ।।

जय जय सुखकारी, जन हितकारी, मेरी नैय्या, हाथ धरें ।
सब भक्त पुकारे, तेरे द्वारे, सकल मनोरथ, पूर्ण करें ।।

?लेला-शिशु, बच्चा