रविवार, 17 अप्रैल 2016

उलचे कितने नीर

      पानी के हर स्रोत को, रखिये आप सहेज ।
      व्यर्थ बहे ना बूॅद भी, करें आप परहेज ।।
     
      वर्षा जल को रोकिये, कुॅआ नदी तालाब ।
      इन स्रोतो पर ध्यान दें, तज नल कूप जनाब ।।
 
      कुॅआ बावली खो गया, गुम पोखर तालाब ।
      स्रोत सामुदायिक नही, खासो आम जनाब ।।
 
      स्रोत सामुदायिक कभी, बांट रहा था प्यार ।
      टैंकर आया गांव में, लेकर पहरेदार ।।
 
      खींचे जल जल-यंत्र से, धरती छाती चीर ।
      स्वेद बूॅद तन पर नही, जाने कैसे पीर ।।
 
      रस्सी बाल्टी हाथ से, उलचे कितने नीर ।
      एक कुॅआ था गांव में, मानों सागर क्षीर ।।
 
      घाट घाट तालाब में, नदी नदी में घाट ।
      पाल रखे थे गांव को, पाले राही बाट ।।
 
      अपनी गलती झांक ले, कहां गांव का प्यार ।
      बात बात में कोसते, दोषी यह सरकार ।।
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