शनिवार, 23 अप्रैल 2016

रखें संतुलित सृष्टि

सूर्य ताप से ये धरा, झुलस रही है तप्त ।
गर्म तवे पर तल रहे, जीव जीव अभिसप्त ।।
जीव जीव अभिसप्त, कर्म गति भोगे अपना ।
सृष्टि चक्र को छेड़, देख मनमानी सपना ।
हाथ जोड़ चौहान, निवेदन करे आप से ।
रखें संतुलित सृष्टि, बचे इस सूर्य ताप से ।।
- रमेश चौहान
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