रविवार, 6 मार्च 2016

एक प्रश्न अंतस खड़ा

पंथ पंथ में बट गया, आज सनातन धर्म ।
नजर नजर का फेर है, अटल सत्य है मर्म ।।
परम तत्व अद्वैत है, सार ग्रंथ है वेद ।
द्वैत किये हैं पंथ सब, इसी बात का खेद ।।
मेरा मनका श्रेष्ठ है, बाकी सब बेकार ।
गुरुवर कहते पंथ के, समझो बेटा सार ।।
जिसे दिखाना सूर्य है, दिखा रहे निज तेज ।
मुक्त कराना छोड़ कर, बांध रखे बंधेज ।।
मैं मूरख यह सोचता, गुरु से बड़ा न कोय ।
गुरु मेरे भगवान सम, करुं कहे वो जोय ।।
एक प्रश्न अंतस खड़ा, भरता है हुंकार ।
पूजो ना रहबर चरण, पूजो पालन हार ।।
अपनी मंजिल के डगर, पूछे हो जब राह ।
मंजिल जाना छोड़ कर, बैठे क्यों गुमराह  ।।
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