मंगलवार, 24 नवंबर 2015

प्रकाश पर्व

है गुरू नानक देव के, अति पावन उपदेश ।
मानव मानव को दिये, मानवता संदेश ।।

एक ओंकार है जगत,ईश्वर एक प्रदीप ।
सृ‍ष्टि आरती हैं करे, चांद सूर्य के दीप ।।

तारे सजते मोति सम, नभ तो थाल स्वरूप ।
सागर देते अर्घ हैं, चंदन साजे धूप ।।

सबद याद रख एक तू, मानव मानव एक ।
मानवता ही धर्म है, धर्म नही अनलेख ।

ऐसे नानक देव के, करते हम अरदास ।
उनके प्रकाश पर्व पर, जग में भरे उजास ।।

एक टिप्पणी भेजें