मंगलवार, 22 सितंबर 2015

जय जय जय गणराज प्रभु....

जय जय जय गणराज प्रभु, जय गजबदन गणेश ।
विघ्न-हरण मंगल करण, हरें हमारे क्लेश।।

गिरिजा नंदन प्रिय परम, महादेव के लाल ।
सोहे गजमुख आपके, तिलक किये हैं भाल ।।
तीन भुवन अरू लोक के, एक आप अखिलेश । जय जय जय गणराज प्रभु....


मातु-पिता के आपने, परिक्रमा कर तीन ।
दिखा दियेे सब देेव को, कितने आप प्र्रवीन ।
मातुु धरा अरू नभ पिता, सबको दे संदेश  ।। जय जय जय गणराज प्रभु...

वेद व्यास के ग्र्रंथ को, किये आप लिपि बद्ध ।
भाव षब्द कोे साथ मे, देव किये आबद्ध ।।
ज्ञान बुद्धि के प्र्रकाषक, देवा आप गणेश । जय जय जय गणराज प्रभु....

प्र्रथम पूज्य आप प्रभुु, वंदन  बारम्बार ।
करें काज निर्विघ्न प्रभुु, पूूजन कर स्वीकार ।।
श्रद्धा अरू विष्वास का, लाये भेट ‘रमेश‘ । जय जय जय गणराज प्रभु....

एक टिप्पणी भेजें