बुधवार, 17 जून 2015

चरण पखारे शिष्य के (कुण्डलिया)

चरण पखारे शिष्य के, शाला में गुरू आज ।
शिष्य बने भगवान जब, गुरूजन के क्या काज ।।
गुरूजन के क्या काज, स्कूल में भोजन पकते ।
पढ़ना-लिखना छोड़, शिष्य तो दावत छकते ।।
कागज का सब खेल, देख लो मन को मारे ।
हुये शिष्य सब पास, चलो अब चरण पखारे ।।

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