शनिवार, 9 मई 2015

अपेक्षा (शक्ति छंद)

अपेक्षा नही है किसी से मुझे ।
खुदा भी नही मुफ्त देते तुझे ।।
भजन जो करेगा सुनेगा खुदा ।
चखे कर्म फल हो न हो नाखुदा ।।

पड़े लोभ में लोेग सारे यहां ।
मदद खुद किसी की करे ना जहां ।।
अपेक्षा रखे दूसरों से वही ।
भरोसा उसे क्या कुुवत पर नही ।।

मदद जोे करे दूसरो का कहीं ।
अभी भी बची आदमीयत वहीं ।
कभी सांच को आंच आवे नही ।
कुहासा सुरूज को ढकें हैं कहीं ।।

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