मंगलवार, 21 अक्तूबर 2014

नित्य-नित्य पखारते, चरण वतन के

मां भारती के शान को, अस्मिता स्वाभिमान को,
अक्षुण सदा रखते, सिपाही कलम के ।
सीमा पर छाती तान, हथेली में रखे प्राण,
चौकस हो सदा डटे, प्रहरी वतन के ।
चांद पग धर कर, माॅस यान भेज कर,
जय हिन्द गान लिखे, विज्ञानी वतन के ।
खेल के मैदान पर, राष्ट्र ध्वज धर कर,
लहराये नभ पर, खिलाड़ी वतन के ।

हाथ कूदाल लिये, श्रम-स्वेद भाल लिये,
श्रम के गीत गा रहे, श्रमिक वतन के ।
कंधो पर हल धर, मन में उमंग भर,
अन्न-धन्न पैदा करे, कृषक वतन के ।
व्यपारी बड़े काम के, निपुण साम दाम के,
उन्नत करते माथा, उद्यमी वतन के ।
खास आम लोग सब, राष्ट्र प्रेम उर धर,
नित्य-नित्य पखारते, चरण वतन के ।
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