शनिवार, 11 अक्तूबर 2014

फैंशन के चक्कर में (घनाक्षरी छंद)

फैंशन के चक्कर में, पश्चिम के टक्कर में
भूले निज संस्कारों को, हिन्द नर नारियां ।
अश्लील गीत गान को, नंगाय परिधान को
शर्म हया के देश में, मिलती क्यों तालियां ।
भाई कहके नंगों को, दादा कह लफंगो को,
रक्त जनित संबंधो को, दे रहे क्यों गालियां ।
दुआ-सलाम छोड़ के, राम से नाता तोड़ के
हाय हैलो बोल-बोल, हिलाते हथेलियां ।

हया रखे ताक पर, तंग वस्त्र धार कर,
लोकलाज कुरेदतीं, आज की लड़कियां ।
नुपूर के छन-छन, कंगना के खन-खन,
नवयुवतियों को देती, मानो कोई गालियां ।
साडि़यां षरमाती है, घाघरा घबराती है,
सामने हो जब कोई, आज की लड़कियां ।
छोड़ सखी सहेली को, नारीत्व के पहेली को
लड़को को मित्र बनाती, आज की लड़कियां ।
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