सोमवार, 30 जून 2014

महंगाई

बढ़े महंगाई, करे कमाई, जो जमाखोर, मनमानी ।
सरकारी ढर्रा, जाने जर्रा, है सांठ गांठ, अभिमानी ।।
अब कौन हमारे, लोग पुकारे, जो करे रक्षा, हम सब की ।
सीखें अर्थशास्त्र, भुल पाकशास्त्र, या करें भजन, अब रब की ।।
-रमेशकुमार सिंह  चौहान

रविवार, 29 जून 2014

पीपल का पेड़ (गीतिका छंद)

पेड़ पीपल का खड़ा है, एक मेरे गांव में ।
शांति पाते लोग सारे , बैठ जिसके छांव में ।।
शाख उन्नत माथ जिसका, पर्ण चंचल शान है ।
हर्ष दुख में साथ रहते, गांव का अभिमान है ।।

पर्ण जिसके गीत गाते, नाचती है डालियां ।
कोपले धानीय जिसके, है बजाती तालियां ।।
मंद शीतल वायु देते, दे रहे औषध कई ।
पूज्य दादा सम हमारे, सीख देते जो नई।

नीर डाले मूल उनके, भक्त आस्थावान जो ।
कामना वह पूर्ण करते, चक्रधारी बिष्णु हो ।।
सर्वव्यापी सा उगे जो, हो जहां मिट्टी नमी ।।
कृष्ण गीता में कहें हैं, पेड़ में पीपल हमी ।

मंगलवार, 17 जून 2014

तांका (लघु कविता)

तांका लघु कविता

1. 
 तितली रानी
सुवासित सुमन
पुष्प दीवानी
आलोकित चमन
नाचती नचाती है ।
2. 
पुष्प की डाली
रंग बिरंगे फूल
हर्षित आली
मदहोश हृदय
कोमल पंखुडि़यां ।
3. 
जुगनू देख
लहर लहरायें
चमके तारे
निज उर प्रकाश
डगर बगराये ।
4. 
 कैसी आशिक
जल मरे पतंगा
जीवन लक्ष्य
मिलना प्रियतम
एक तरफा प्यार ।
5. 
 चिंतन करो
चिंता चिता की राह
क्या समाधान
व्यस्त रखो जी तन
मस्त रखो जी मन ।।
6. 
 हर चुनाव
बदले तकदीर
नेताओं का ही
सोचती रह जाती
ये जनता बेचारी ।।
7.  
लूटते सभी
सरकारी संपदा
कम या ज्यादा
टैक्स व काम चोर
इल्जाम नेता सिर ।।
8. 
 उठा रहे है
नजायज फायदा
चल रही है
सरकारी योजना
अमीर गरीब हो ।।
9.
 जनता चोर
नेता है महाचोर
शर्म शर्माती
कदाचरण लगे
सदाचरण सम ।।
10.  
जल भीतर
अटखेली करते
मीनो का झुण्ड़
सड़ा एक मछली
दुषित सारे नीर।।
11.  
श्रम की पूजा
कर्मवीर बनाते
भाग्य की रेखा
स्वर्णिम लगते हैं
श्रम अंकित हस्त ।
12. 
 मई दिवस
मजदूर सम्मान
विश्व करते
श्रम का यशगान
श्रमवीर महान ।।
13. 
 दिन का स्वप्न
देख रहा है वह
नाचता मन
बंधे हाथ पैर है
कैसे मिलेगी खुशी ।।
14. 
 भोग किया है
कठोर वनवास
अवध राजा राम
श्रम की साधना से
बने वो भगवान ।।
15. 
 शिक्षा व्यपार
बिकती है उपाधि
किताबी कीड़े
कुचले जा रहे यहां
ढूंढते रोजगार ।
16.
  दोष किसका ?
रोज हो रहे रेप
स्वतंत्र कौन ?
नेता या सरकार
निरंकुश समाज ।
17. 
 कर्तव्य क्या है ?
राम जाने हमें क्या
हक की चाह
हमें क्या परवाह
अपना काम सधे ।