मंगलवार, 10 सितंबर 2013

शिक्षक दिवस दोहावली


गुरू की गुरूता कौन कहे, गुरू सा कौन महान ।
गुरू की सब शरण पड़े,   देव मनुज भगवान ।

गुरूपूणिर्मा पर्व अब, बिते दिनों की बात ।
शिक्षक भये राष्ट्रपति, शिक्षक दिवस सौगात ।।



शिक्षक को गुरू कोई कहे, कोई चाकर मात्र ।
सुविधादाता शिक्षक बने, सुविधाभोगी छात्र ।

‘बाल देवो भव‘ अब लगे, नारा बन दीवार ।
शिक्षक तो अब होने लगे, नव नीति के शिकार ।

शिक्षक छात्र न डाटिईये, छात्र डाटना पाप ।
शिक्षक छात्रा साथी बने, अब कहां रहा बाप ।।

..........‘‘रमेश‘‘.........
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