बुधवार, 22 मई 2013

// अब तो आ जाओ साजन मेरे पास //


कब से गये हो तुम सागर पार ,
मुझे छोड़ गये हो मझदार ,
तुझ बिन नही मेरे जीवन की आस,
अब  तो आ जाओ मेरे साजन पास ।
   
    तन की हल्दी चिड़ाती मुझे,
    हाथों की मेंहंदी रूलाती मुझे,
    न साज न श्रृंगार नही अब कुछ खास,
    अब  तो आ जाओ साजन मेरे पास।

तुझ बिन मेरे सांसे है मध्यम,
अब न मुस्कुराता है मेरा मन,
मेरे मन का तु ही है विश्वास,
अब  तो आ जाओ साजन मेरे पास।
   
    तस्वीर देख दिन कटता है मेरा,
    सांझ समान ही है अब तो सबेरा,
    तुझ बीन अंधेरा ही है आसपास,
    अब  तो आ जाओ साजन मेरे पास ।

कह गयें थे जल्दी आने को,
सभी गम को भुलाने को,
सो हो भी नहीं सकता उदास,
अब  तो आ जाओ साजन मेरे पास ।
..............‘‘रमेश‘‘..............................
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